बांग्लादेश में आंदोलन के 2 साल पूरे होने को हैं. लेकिन अब इस देश की सियासत एक बार फिर से करवट ले रही है. छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़ने वाली पूर्व पीएम शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर दिया है. इस बीच देश का मिजाज करने समझने के लिए अवामी लीग बुधवार को एक विशाल रैली करने जा रही है.
और पढ़ेंपार्टी अपनी मौजूदगी और ताकत साबित करने के लिए पूरे बांग्लादेश में सड़कों पर उतर रही है. उन्होंने बताया है कि बुधवार को देशव्यापी जुलूस और सभा का कार्यक्रम रखा गया है. अनुमान है कि लाखों लोग इसमें शामिल होंगे.
अवामी लीग का दावा है कि शेख हसीना के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया फैसला अवैध है. वे इसके विरोध में सड़कों पर उतरेंगे. हाल ही में एक मामले में न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है.
बांग्लादेश में सुगबुगाहट
हाल ही में बीएनपी के एक सांसद ने संसद में जमात-ए-इस्लामी का नाम लिए बिना उस पर हमला किया और एक बार फिर से जमात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.
इस पर जमात ने बीएनपी के इरादों पर सवाल उठाए. जमात ने कहा कि क्या तारिक रहमान की पार्टी अवामी लीग को विपक्षी ताकत के रूप में देखना चाहती है?
ऐसी स्थिति में शेख हसीना बांग्लादेश में अपनी मजबूत स्थिति दिखाने की कोशिश कर रही हैं. इसीलिए उन्होंने जुलूस का आह्वान किया है. बुधवार की इस रैली पर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की निगाहें हैं. अब देखना होगा कि ढाका में अवामी लीग की रैली में कितनी भीड़ जुटती है और उन्हें कैसा जन समर्थन मिलता है.
BNP सरकार इस रैली को लेकर सतर्क है और पूरे घटनाक्रम पर उसकी नजरें हैं.
अवामी लीग ने रैली का ऐलान किया
सोमवार को जारी एक बयान में पार्टी ने पूरे बांग्लादेश में अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से विरोध रैलियों और प्रदर्शनों में शामिल होने का आग्रह किया. पार्टी ने ट्रिब्यूनल के फैसले को "गैर-कानूनी" और इसे सुनाने वाली अदालत को "गैर-कानूनी और असंवैधानिक" बताया है.
अवामी लीग ने कहा कि शेख हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश ने सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम की. इसमें कम विकसित देश से मध्यम-आय वाले देश का दर्जा पाना भी शामिल है. बयान के अनुसार उनकी सरकार का मुख्य ध्यान आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर था.
अवामी लीग ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल कर रही है. पार्टी ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार के पास लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है और वह कामकाज में अपनी कमियों को छिपाने के लिए दमनकारी तरीकों का सहारा ले रही है.
मौजूदा राजनीतिक हालात पर बात करते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सत्ता पर जबरदस्ती कब्ज़ा किया गया है और विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. पार्टी ने दावा किया कि न्यायिक कार्यवाही का राजनीतिकरण हो गया है.
गैर कानूनी प्रक्रिया के जरिये मौत की सजा
बयान में शेख हसीना को "जनता की आवाज़" भी कहा गया और आरोप लगाया गया कि उन्हें एक ऐसी गैर-कानूनी न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए मौत की सज़ा सुनाई गई, जिसका मकसद उन्हें राजनीतिक रूप से चुप कराना था. पार्टी ने नागरिकों से ट्रिब्यूनल और उसके फैसले का विरोध करने को कहा और तर्क दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के हितों की रक्षा के लिए ऐसा विरोध जरूरी है.
बता दें कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग की सरकार गिरने के बाद शेख हसीना भारत चली आई थीं. और उनकी गैर-मौजूदगी में बांग्लादेश में मुकदमा चलाया गया. तब से बांग्लादेश ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है, हालांकि भारत ने इस अनुरोध को मानने का कोई संकेत नहीं दिया है.
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